
जगदलपुर के टाउन क्लब के प्रांगण में राधा रमण समिति के द्वारा श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के कार्यक्रम में आज छठवें दिवस रुक्मिणी स्वयंवर का आयोजन किया गया जिसमें जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु एवं भक्त माता बहने बड़े बुजुर्ग एवं बच्चे बड़े ही हर्षसो उल्लास के साथ कार्यक्रम स्थल पर उमड़ पड़े।
कथा व्यास अभिषेक पाठक जी महाराज के द्वारा आज भगवान श्री कृष्ण एवं माता रुक्मिणी स्वयंवर अमृत कथा का प्रसार करते हुए भक्त जनों को बताया कि रुक्मिणी स्वयंवर कथा, भगवान श्रीकृष्ण और विदर्भ की राजकुमारी रुक्मिणी के विवाह की दिव्य कहानी है।
जिसमें रुक्मिणी ने श्रीकृष्ण के गुणों से प्रभावित होकर उनसे विवाह करने का निश्चय किया, जबकि उनके भाई रुक्मी ने शिशुपाल से उनका विवाह तय कर दिया था; अंततः कृष्ण ने रुक्मिणी का हरण कर, युद्ध के बाद विधिपूर्वक उनसे विवाह किया, जो प्रेम, विश्वास और निष्ठा का प्रतीक है और आध्यात्मिक रूप से सफल वैवाहिक जीवन के लिए एक प्रेरणा मानी जाती है।
विदर्भ की राजकुमारी रुक्मिणी बचपन से ही श्रीकृष्ण के रूप, पराक्रम और गुणों से प्रभावित थीं और उन्हें ही अपना पति बनाना चाहती थीं। रुक्मिणी के भाई रुक्मी,का विवाह शिशुपाल से कराना चाहते थे, जो एक दुष्ट राजा था।
रुक्मिणी ने श्रीकृष्ण को एक ब्राह्मण के हाथ संदेश भेजा, जिसमें उन्होंने उनसे अपने हरण और विवाह का अनुरोध किया। श्रीकृष्ण ने रुक्मिणी का संदेश स्वीकार किया और विवाह के दिन, जब सभी राजा एकत्र थे, उन्होंने रुक्मिणी का हरण कर लिया।
रुक्मणी और उसके सहयोगियों ने श्रीकृष्ण पर हमला किया, लेकिन श्रीकृष्ण ने बलराम और अपनी सेना की सहायता से उन्हें परास्त किया। श्रीकृष्ण रुक्मिणी को द्वारका ले गए और भव्य समारोह के साथ उनका विवाह संपन्न हुआ।
श्री कृष्णा और रुक्मणी विवाह में जगदलपुर नगर के श्रद्धालु एवं भक्तों ने विवाह में शामिल होकर जमकर उत्साह मनाया और बड़े बूढ़े बुजुर्ग सभी ने जमकर नृत्य करते हुए अपने खुशी का इजहार किया कार्यक्रम स्थल पर मानो ऐसे प्रतीत हो रहा था कि साक्षात श्री कृष्णा और माता रुक्मणी का विवाह संपन्न हो रहा था जिसमें पूरे शहर वासी झूम कर नृत्य कर रहे थे











